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अन्तराष्ट्रीय गुर्जर दिवस को बना रहे राजनीती

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गुर्जर समाज का यह  संगठन अखिल भारतीय वीर गुर्जर महासभा एक राजनीतिक संगठन है जिसका उद्देश्य ही समाज के नाम पर राजनीति करना है ।12 सितंबर को  अंतर्राष्ट्रीय गुर्जर दिवस की रणनीति नहीं बना रहे हैं । बल्की अंतरराष्ट्रीय गुर्जर दिवस को राजनीति बना रहे हैं । क्योंकि उनको पता ही नहीं है के अंतर्राष्ट्रीय गुर्जर दिवस है कब ?? क्योंकि यह बहुत पहले सम्राट कनिष्क के राज्यरोहण दिवस पर अंतर्राष्ट्रीय गुर्जर दिवस मना चुके हैं । बाद में किसी ने कह दिया कि कनिष्क गुर्जर नहीं है। तो इन्होंने सम्राट कनिष्क को गुर्जर मानने से ही  इनकार कर दिया क्योकी यह कोई इतिहासकार तो हे इधर उधर से उठा पटककर  समाज को जो मर्जी आये इतिहास के नाम पर परोस रहे हे बीना किसी रिसर्च के जब भाइयों आप को कुछ पता ही ना हो ओर किसी के कहने पर आप अंतर्राष्ट्रीय गुर्जर दिवस कभी सम्राट कनिष्क के नाम पर कभी मिहिर भोज के नाम पर मना रहे हो ओर ऐसा करके समाज के लोगो को igd को लेकर क्यो गुमराह कर रहे हो अगर तुमसे किसी ने सबूत मागा हे  ओर तुम्हारे पास सबूत उपलब्ध नही थे तो इसका मतलब यह निकाला कि कषाणा कुष...

"पगड़ी तू सम्भाल गुर्जरां" कर तू कमाल गुर्जरां

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सोचा लिख ही दूँ, हाल ही में दक्षिणी दिल्ली में नगर निगम के भाजपाई सत्तासीन ने एक पार्षद के प्रस्ताव को यह कहकर ठुकरा दिया की राजेश पायलट महापुरूष नही है और राजेश खन्ना को महापुरूष स्वीकार करके एक बड़े पार्क का नाम उनके नाम पर कर दिया,ख़ैर तुलना कतई नही है,एक अभिनेता थे जो,एक राजनेता थे।रही बात पायलट साब की तो पायलट किसान और मजदूरों के सर्वमान्य महान नेता थे,एक सफ़ल नेता और लोकप्रिय सांसद, ईमानदार, जनप्रिय,कर्मठ,विकासोन्मुखी,नई सोच से भरे हुए,निर्णायक सोच के और किसान मजदूरों के सच्चे हितैषी।महापुरुष तो वे थे। दिल्ली के इन पार्षद और अन्य पार्षदों के लिए एक सुझाव और सलाह है कि इस बार फिर प्रस्ताव भेजो और उसमें पार्कों,सड़कों,पुलों,चौक चौराहों,संस्थाओं और खेल मैदानों के नाम चक्रवर्ती सम्राट कनिष्क कसाना, गुर्जर सम्राट मिहिरभोज,गुर्जर सम्राट नागभट्ट,सम्राट मिहिरकुल हूण,हिन्दरक्षक महाराजा जयभट गुर्जर,1857 की क्रांति के जनक क्रान्तिनायक कोतवाल धन सिंह गुर्जर, शहीद राजा विजय सिंह गुर्जर,राजस्थान केसरी वीर विजय सिंह पथिक,क्रान्तिवीर राव कदम सिंह गुर्जर,क्रान्तिवीर राव उमराव सिंह भाटी, मुक़...

12 सितम्बर 2018 मिहिरोत्सव विशेष

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12 सितम्बर मिहिरोत्सव दिवस विशेष हूणों से जन्मे गुर्जर प्रतिहार राजवंश गुर्जर प्रतिहार साम्राज्य और उसके प्रतापी सम्राट उत्तर भारत में वर्धनवंश के पतन के बाद उत्तर भारत पर एकक्षत्र शासक गुर्जर प्रतिहार थे। नागभट्ट नाम के एक गुर्जर नवयुवक ने इस नये गुर्जर साम्राज्य की नींव रखी। संभव है कि ये भडौच के गुर्जर प्रतिहार शासको का ही राजकुंवर था, जयभट्ट का पुत्र । पूरे उत्तर भारत में छोटे छोटे राज्य थे जो किसी भी बाह्य आक्रमण को विफल करने में पंगु बने हुए थे। भडौच के गुर्जर प्रतिहार, वल्लभी के गुर्जर मैत्रक, वातापी के गुर्जर चालुक्य, भीनमाल के चपराणे,चित्तौड के मोरी गुर्जर,अजमेर के चेची व फिर चौहान, भटनेर के भाटी, बयाना के भडाणा, दिल्ली के तंवर,जालौर के प्रतिहार, वेंगी के चालुक्य ये सब गुर्जरो की शाखाए केवल गुर्जरत्रा तक सीमित थी। इन सबमें केवल बादामी के चालुक्य साम्राज्य के स्वामी थे। वह काल विश्व इतिहास में उथल पुथल का था, संस्कृति व सभ्यताओ पर अतिक्रमण का था। अरब से उठने वाली इस्लामिक लपटो ने बहुत सी संस्कृतियो व सभ्यताओ को निगल कर उन स्थानो को इस्लामिक रंग में रंग दिया थ...

गुर्जरी माता पन्ना धाय पेनोरमा कमेरी

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राजस्थान सरकार द्वारा बनाए गए महाबलिदानी पन्नाधाय पनोरमा राजसमन्द का माननीया मुख्यमंत्री वसुन्धरा राजे जी द्वारा उद्घाटन राजसमन्द में सार्वजनिक समारोह में किया गया। राजस्थान धरोहर संरक्षण एवं प्रोन्नति प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री ओंकार सिंह जी लखावत के मार्गदर्शन एवं प्रमुख शासन सचिव, कला एवं संस्कृति विभाग श्री कुलदीप रांका के निर्देशन में बनाया गया है। प्राधिकरण के मुख्य कार्यकारी अधिकारी टीकम बोहरा ने इस पेनोरमा की पटकथा लेखन और डिस्प्ले प्लान बनाने का कार्य किया। प्राधिकरण के सदस्य श्री कंवल प्रकाश जी किशनानी के परामर्श से अजमेर के जमाल  ने पनोरमा में डिस्प्ले का कार्य किया। इस उद्घाटन के अवसर पर प्राधिकरण की टीम में सदस्य श्री हुसैन खान भी मौजूद रहे। पनोरमा भवन का निर्माण कार्य प्राधिकरण के अधिशाषी अभियन्ता श्री सुरेश स्वामी के निर्देशन में सहायक अभियन्ता श्री सोहन लाल जी प्रजापति द्वारा कराया गया। इस पनोरमा में 2 डी फ़ाइबर पेनल 3 डी फ़ाइबर मूर्तियाँ मेसर्स आरती आर्ट्स जयपुर के आलोक बनर्जी द्वारा बनायी गयी। पन्नाधाय पेनोरमा, कमेरी (राजसमन्द) 🔸नाम:- वीरांगना पन्ना...

सुरसुरा की बावड़ी का लेख,,,

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सुरसुरा की बावड़ी का लेख !! #inscription_of_surasara_vapi { कृपया पूरी पोस्ट ध्यान से पढ़ें !! } राजस्थान की तेजाजी वीर गाथा में जिस लाछा गूर्जरी का जिक्र आता है, उसकी स्मृतियां किशनगढ़ के पास की एक बावड़ी से जुड़ी है। यह लाच्छा गूर्जरी की बाव के रूप में बताई जाती है ????? {तेजा ज़ी महाराज के सन्दर्भ में लाछा गूर्जरी का प्रसंग आता है उसको इससे ज़बरदस्ती लिंक करने की कोशिश की गई कुछ असामाजिक / अज्ञानी तत्त्वों के द्वारा !! जय जय } इस बाव पर एक शिलालेख लगा है संवत 1751 ( 1694 ईसवी) का। इसमें आषाढ़ की उजाली 10 तिथि को बावड़ी की प्रतिष्ठा होने, बावड़ी के निर्माण पर साढ़े चार हजार रुपए खर्च होने और उसके समारोह की जानकारी है। सबसे रोचक बात यह है कि लाछा ने इसको कुंड लिखा और खुद को बडारण महादोजजी सुरतान कच्छावा की लिखवाया है, गूर्जरी नहीं। यह अभिलेख गणेश के कर्क सम रेखांकन के साथ उत्कीर्ण है। दो साल पहले मित्र मदन मीना जी के लिए इसका मैने वाचन किया और आज भगवती नितिला ने दोबारा भेजा तो मन हुआ कि सब मित्र इसका लाभ लें। यह भी जानें कि इसे यदि पहले पढ़ लिया जाता तो मान्यता अलग होत...

देव धाम देवमाली की कहानी

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पसन्द आये तो शेयर जरूर करें। अजमेर. राजस्थान के अजमेर जिले में आता है देवमाली गांव। इस गांव की कहानी बड़ी दिलचस्प है। यहां के लोग आर्थिक रूप से संपन्न होते हुए भी पक्के का मकान नहीं बनाते हैं और मिट्टी के घरों में रहते हैं। यही नहीं, यहां आज भी मिट्टी के चूल्हे का इस्तेमाल किया जाता है। इसके पीछे गांव वालों की एक मान्यता है। यहीं नहीं यहां के लोग शादी में दूल्हे को घोड़े पर नहीं बिठाते हैं। जानिए क्यों घोड़ी पर नहीं बैठता दूल्हा ... - देवमाली गांव में शादी के दौरान दूल्हे को घोड़ी पर नहीं बिठाया जाता है। - गांव वालों का मानना है कि इससे मैरिज के बाद हादसे हो जाते हैं। - गांव वालों का मानना है कि पक्के का घर बनाते ही गांव में कोई आपदा आ जाती है। - बता दें कि इस गांव के लोग खुद को एक ही पूर्वज के संतान मानते हैं। उनका कहना है कि उनके पूर्वज ने ही देवमाली गांव को बसाया था। - कई लोगों ने इस गांव में पक्के का मकान बनाया, लेकिन कुछ ही दिनों में पूरा मकान ढह गया। - देवमाली के लोग इसे एक मान्यता मानते हैं। जबकि, आस-पास के गांवों के लोग इसे अंधविश्वास कहते हैं। शाकाहारी ह...

गुर्जर आंदोलन में देरी के कारण

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🤝 *#__गुर्जर__आंदोलन__में__देरी__के__कारण_* 🤝 1. *5 मार्च को गुर्जर आंदोलन की पूरी तैयारी हो चुकी थी युवा आंदोलन के मुड़ में थे पर एन वक्त पर आंदोलन की तारीख क्यों बढ़ा दी गई ???* @. क्योंकि गुर्जर आंदोलन के मुख्य लीडर ने कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला ने कहा की में तुम्हे खुश करने के लिये किसानो को नुकसान नही पहुँचा सकता अभी खेतो ने काम का समय है कृषि हमारा मुख्य व्यवसाय है इसलिये खेतखलियानो से निपट लो 2. *25 दिन बाद मलारना स्टेशन पर सीधा रेल रोको आंदोलन का एलान 25 दिन तो पुरे हो गए ???* @. 25 दिन के अंदर अंदर रेल रोकना गुर्जरो के आसान था लेकिन मलारना स्टेशन के साथ अन्य जिलो में आंदोलन की रुपरेखा तैयार नही हुई इसके जिम्मेदार कर्नल बैंसला नही बल्कि वो तमाम गुर्जर नेता है जो कर्नल साहब की टीम के सदस्य है ये उनका कर्तव्य बनता है की हर जिले में आंदोलन के नेत्रत्वकर्ताओ का चयन कर लीडर को अवगत कराना लेकिन ये कर्नल की ही नही हमारी भी कमजोरी बनते जा रहे है सतर्क रहे 3. *प्रदेशभर में युवाओ ने गुर्जर महाआक्रोश रैलिया निकाली उसका क्या फायदा हुआ ???* @. गुर्जर य...